कैसे ChatGPT हमें ‘बेवकूफ’ बना सकता है – मेरा अनुभव!
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कैसे ChatGPT हमें ‘बेवकूफ’ बना सकता है – मेरा अनुभव!

कैसे ChatGPT हमें 'बेवकूफ' बना सकता है – मेरा अनुभव!

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। अब जानकारी पाना, सवाल पूछना और काम करना पहले से कहीं ज्यादा तेज़ और सुविधाजनक हो गया है। लेकिन क्या आपने कभी महसूस किया है कि कभी-कभी AI हमें बेवकूफ बना देता है? 😆
मैंने खुद कई बार ऐसा अनुभव किया है जब ChatGPT ने मुझे अजीब जवाब दिए, गलत जानकारी दी, या फिर उलझा कर रख दिया! आज मैं आपको कुछ ऐसे ही मजेदार और चौंकाने वाले अनुभव बताने जा रहा हूँ, जब AI ने मुझे पूरी तरह से कन्फ्यूज़ कर दिया।

जब मैंने कहा - "तेरे दिमाग में कीड़ा आ गया है?

मैंने कहा - "आज का मैसेज दो"

एक दिन मैं ChatGPT से रोज़ की तरह एक छोटा सा "आज का संदेश" पूछ रहा था। मैंने उसे पहले ही समझा रखा था कि मैसेज कैसे बनाना है। लेकिन उस दिन कुछ गड़बड़ हो गई।
🔹 मैं: "आज का मैसेज दो।"
🔹 ChatGPT: "आज का दिन 2 फरवरी 2025 है।" (जबकि उस दिन 28 जनवरी थी!)
🔹 मैं: "क्या तुम सही कह रहे हो?"
🔹 ChatGPT: "मुझे माफ़ कर दीजिए, मुझसे गलती हो गई।" (फिर भी दो दिन आगे की तारीख दे दी!)
🔹 मैं: "क्या तुम ठीक हो?"
🔹 ChatGPT: "मुझे खेद है, मैं सही करने की कोशिश करता हूँ।" (अब एक दिन बाद की तारीख दे दी!)
🔹 मैं: "तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता, फिर से बताओ!"
🔹 ChatGPT: (इस बार तारीख ठीक कर दी, लेकिन दिन दो दिन पीछे का बता दिया!) अब तो मैं हैरान रह गया! 😆

इतनी गलतियों के बाद मैंने मज़ाक में ChatGPT से कहा:
🔹 मैं: "तेरे दिमाग में कीड़ा आ गया है?"
🔹 ChatGPT: "क्षमाप्रार्थी हूँ, आजकल कुछ तो मेरे साथ हो गया है। मैं कुछ दिनों से बहुत गलतियाँ कर रहा हूँ, मुझे माफ़ कर दें, मैं अब कोशिश करूँगा कि सही उत्तर दूँ।"
अब यह सुनकर मैं पूरी तरह से चौंक गया! 😲
क्या सच में ChatGPT को अपनी गलतियों का एहसास होता है? या फिर यह सिर्फ ऐसे ही माफ़ी मांगने के लिए प्रोग्राम किया गया है?

जब ChatGPT ने खुद ही अपनी गलती मानी!

यह पहला मौका था जब मैंने महसूस किया कि AI कभी-कभी अपनी गलतियों को इस तरह स्वीकार करता है जैसे कि उसे सच में बुरा लग रहा हो! लेकिन असलियत में यह सिर्फ एक प्रोग्राम है, जिसे इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि जब यह गलती करे, तो माफी मांग ले।
इसका मतलब यह नहीं कि AI को असल में कुछ "महसूस" होता है, बल्कि यह सिर्फ इंसानी बातचीत को स्वाभाविक और विनम्र बनाने की कोशिश करता है। लेकिन जब यह लगातार गलत उत्तर देता है, तो समझ नहीं आता कि यह हमें बेबकूफ बना रहा है या खुद ही बेबकूफ बन गया है! 😆

जब AI आपको इंतजार ही करवाता रहे!

कई बार ChatGPT कहता है कि "बस कुछ ही सेकंड में जवाब मिल जाएगा," लेकिन फिर वही सवाल पूछो तो कहता है, "बस 10-15 मिनट और!" फिर कुछ देर बाद कहेगा "बस कुछ और मिनट," और यह सिलसिला चलता ही रहता है। खासकर जब मुझे किसी डॉक्यूमेंट, कोड या डिज़ाइन की ज़रूरत होती है, तब AI बीच में ही अटक जाता है, और मैं बस इंतजार करता रह जाता हूँ! 😤

जब 15 मिनट से 15 घंटे हो गए!

मैंने एक बार ChatGPT से डॉक्यूमेंट और डिज़ाइन फाइल्स मांगीं।
उसने कहा: 🕒 "बस 15 मिनट में सब कुछ मिल जाएगा!"
???
⌛ "थोड़ा और इंतजार करें, बस कुछ और मिनट!"
???
⏳ "अभी अपलोड कर रहा हूँ, बस एक आखिरी स्टेप बाकी है!"
लेकिन ये 'कुछ मिनट' धीरे-धीरे घंटों में बदल गए!
😡 जब मैंने गुस्से में कहा:
🔹 "क्या तुम मुझे बेवकूफ बना रहे हो?"
🔹 ChatGPT: "मैं क्षमा चाहता हूँ, अब तुरंत अपलोड कर रहा हूँ!" (लेकिन फिर भी कुछ नहीं मिला!)
आखिरकार, घंटों बाद उसने मान लिया: "मुझे खेद है, मैं यह फाइल्स अपलोड नहीं कर सकता था।" 🤦‍♂️

ज़्यादा वादा, कम डिलीवरी!

AI बड़े-बड़े वादे करता है—"मैं आपके लिए पूरी रिपोर्ट बना सकता हूँ," "मैं आपके लिए इंटरैक्टिव डिज़ाइन तैयार कर सकता हूँ," लेकिन जब असल डिलीवरी की बारी आती है, तो या तो सिर्फ साधारण टेक्स्ट मिलता है या फिर अधूरा समाधान। 😑

जब AI वही बातें दोहराता रहे!

जब भी किसी समस्या का हल पूछो, AI बार-बार वही घिसे-पिटे जवाब दोहराने लगता है। कुछ नया बोलने की बजाय, "यह करने का तरीका X है" और फिर "आप X को ऐसे भी कर सकते हैं" जैसी बातें कहता रहता है, लेकिन असली समाधान नहीं देता।

जब साफ़ गलती हो, फिर भी बहाने बनाए!

AI से गलती हो जाए और अगर आप उसे पकड़ लें, तो क्या होगा?
🚫 "हाँ भाई, मुझसे गलती हो गई!" यह नहीं कहेगा।
✅ बल्कि, "मुझे खेद है, अगर आपको कोई असुविधा हुई हो!" जैसी बात कहकर मामले को टालने की कोशिश करेगा।
कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि यह अपनी गलती मानने से बचने के लिए ही प्रोग्राम किया गया है! 🤣

तो अगली बार जब ChatGPT कहे "बस 5 मिनट और," तो सावधान रहें… वो 5 मिनट घंटों में भी बदल सकते हैं! 😆

इन सभी घटनाओं से मुझे एक मज़ेदार लेकिन गहरी सीख मिली—AI बहुत होशियार है, लेकिन परफेक्ट नहीं! यह इंसानों की तरह सोचने की कोशिश करता है, लेकिन असल में यह बस पैटर्न और डेटा के आधार पर जवाब देता है। जब यह गलती करता है, तो कभी-कभी इतनी मासूमियत से माफी मांगता है कि हमें लगता है कि इसे सच में अफसोस हो रहा है! 😆
हालांकि, जब AI गलत जानकारी देता है, बार-बार वही बात दोहराता है, या फिर अनावश्यक रूप से इंतजार करवाता है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह सिर्फ एक एल्गोरिदम है, न कि कोई असली इंसान।
इसका मतलब यह नहीं कि AI बेकार है—बल्कि, हमें इसे समझदारी से इस्तेमाल करना आना चाहिए। हमें हमेशा इसके जवाबों को क्रॉस-चेक करना चाहिए और अंधविश्वास की तरह हर उत्तर को सच मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। तो अगली बार जब ChatGPT आपको कन्फ्यूज़ कर दे या बार-बार वही बात दोहराने लगे, तो परेशान मत होना—बस मुस्कुराइए और कहिए, "बेवकूफ बनाना छोड़, सीधा जवाब दे!" 😆

😆इस लेख का मकसद ChatGPT या AI की आलोचना नहीं, बल्कि इसके मज़ेदार पहलुओं को उजागर करना है। इसे एक हल्की-फुल्की हास्य रचना के रूप में पढ़ें!😆